आज जब बात चली तो ये कहने में या यू कहे कि स्वीकार करने में कोई गुरेज नहीं है कि हम अधिकांश हिन्दू कॉयर,मतलबी और बुजदिल होते हैं। ये कोई नई बात नहीं है। हजारों साल से चल रहा है।
ये तो अपने इष्ट पर भी मजाक बनाते है और गर्व से बनते देखते रहते है।
आप अपने यहां का ही उदाहरण देख लिजिये।
5 हिन्दू परिवार ने मिलकर काम करने वाले मजदूरों को धमका दिया कि तुम मंदिर में काम नहीं करोगे।
ये कौन लोग है? सभी हिन्दू ही है या फिर इनके पूर्वज मुसलमान रहे होंगे।
हैरानी है फिर भी सनातन का अस्तित्व है।
हम लोग बहुत सारे पंथ, गुरुओं के शिष्य और अपने विचारों के गुलाम होकर रह गये है।यही विचार और पंथ हमें अपने ही सनातन से दूर किये जा रहा है इतना कि हमें अपने धर्म के लिए आवाज़ उठाने की हिम्मत ही नहीं रही।
रही बात इंद्रप्रस्थ कि तो अभी की सरकार ने अब जाकर इतिहास के पन्नों से मुगलो का
गुणगान हटाने की हिम्मत तो की है।अब आगे देखिये क्या होता हैं।शायद कल दिल्ली फिर से इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाने लगेगा।पर तब हम न हो लेकिन आशा है सनातन तब भी होगा।
हमे अलग अलग संप्रदाय और गुटों में बांटने का जितना जाती प्रथा का हाथ रहा है उतना ही हमारे धर्म गुरुओं का भी रहा है। गुरुओं ने हमेशा ही अपने विचार को अपने शिष्यों पर थोपने की कोशिश की और डर से या और तरीके से उन्हें सनातन से अलग हट कर सोचने के लिए विवश किया।कभी ये नहीं कहा कि जिन विचारों से मै आपको अवगत करा रहा हु वो सनातन से ही आया हैं।
सनातन के पतन के जिम्मेदार दोनों ही है।
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